01अग्रिम प्राधिकार: निर्यात के लिए कच्चा माल
अगर आयातित सामग्री आपके निर्यात होने वाले माल में लगती है, तो अग्रिम प्राधिकार से आप उसे मूल सीमा शुल्क, IGST और क्षतिपूर्ति उपकर के बिना आयात कर सकते हैं। आपको निर्यात दायित्व की अवधि में तैयार उत्पाद निर्यात करना होगा और कम से कम 15% मूल्य-वृद्धि करनी होगी (कुछ क्षेत्रों में अधिक)। अग्रिम प्राधिकार योजना का पेज देखें।
02EPCG: मशीनरी
EPCG के तहत आप पूंजीगत वस्तुएँ शून्य सीमा शुल्क पर आयात करते हैं, और आपको छह साल में बचाए गए शुल्क का छह गुना निर्यात करना होता है। प्राधिकार आयात के लिए 24 महीने तक मान्य है और इसका पुनर्वैधीकरण नहीं होता।
03SEZ और EOU इकाइयाँ
विशेष आर्थिक क्षेत्र की इकाइयाँ और निर्यातोन्मुख इकाइयाँ, जब तक वे शुद्ध विदेशी मुद्रा अर्जक बनी रहती हैं, कच्चा माल और पूंजीगत वस्तुएँ शुल्क-मुक्त आयात करती हैं। वे भारत में जो माल बेचती हैं, उस पर आयात की तरह शुल्क लगता है।
04मुक्त व्यापार समझौते और उद्गम प्रमाणपत्र
अगर माल ऐसे देश का है जिसका भारत से व्यापार समझौता है (जैसे आसियान सदस्य देश, जापान, दक्षिण कोरिया, UAE या ऑस्ट्रेलिया), तो आप कम “रियायती” दर का दावा कर सकते हैं। आपके पास उस देश में समझौते के तहत जारी वैध उद्गम प्रमाणपत्र होना चाहिए, और माल को वास्तव में उसके उद्गम नियम पूरे करने चाहिए — केवल वहाँ से भेजा जाना काफ़ी नहीं।
05CAROTAR 2020: FTA दर का दावा करते समय आपके दायित्व
सीमा शुल्क (व्यापार समझौतों के तहत उद्गम नियमों का प्रशासन) नियम, 2020 (अधिसूचना 81/2020-सीमा शुल्क (गै.टै.), 21 सितंबर 2020 से लागू) ज़िम्मेदारी आयातक पर डालते हैं।
- रियायती दर का दावा करने से पहले फ़ॉर्म I में बताई गई उद्गम जानकारी (माल उद्गम मानदंड कैसे पूरे करता है) अपने पास रखें, और माँगे जाने पर प्रस्तुत करें।
- सहायक दस्तावेज़ बिल ऑफ़ एंट्री की तारीख़ से कम से कम पाँच साल तक रखें।
- कस्टम के जानकारी माँगने पर दस कार्यदिवस के भीतर जवाब दें।
- उद्गम सिद्ध न हो पाए तो रियायत अस्वीकार होती है और आपको सामान्य शुल्क चुकाना पड़ता है, संभवतः जुर्माने के साथ।
