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आयात 07 · 6 मिनट

आयात का भुगतान: 1 अक्टूबर 2026 से RBI के नियम

RBI के नए निर्यात और आयात विनियम, 2026 पुराने मास्टर निर्देश वाले तरीक़े की जगह लेते हैं। आयातक के लिए क्या बदलता है, यह रहा।

01नई नियम-पुस्तिका

विदेशी मुद्रा प्रबंधन (वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात और आयात) विनियम, 2026 (अधिसूचना FEMA 23(R)/2026-RB दिनांक 13 जनवरी 2026, 22 सितंबर 2026 को संशोधित) 1 अक्टूबर 2026 से लागू हैं। जो कई निर्णय पहले RBI की मंज़ूरी माँगते थे, वे अब आपके अधिकृत डीलर बैंक पर छोड़ दिए गए हैं, जिसे अपनी नीति, दस्तावेज़ों की सूची, समय-सीमा और शुल्क अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करने होते हैं।

02भुगतान कब करना है

आपूर्तिकर्ता के साथ अनुबंध में तय अवधि के भीतर भुगतान करें। आपका बैंक हर बिल ऑफ़ एंट्री को IDPMS में देखता है और पीछा करता है। अधिक समय चाहिए तो बैंक से कारण सहित लिखित अनुरोध करें; वह अवधि बढ़ा सकता है। देरी से भुगतान पर ब्याज RBI की व्यापार ऋण की समग्र लागत सीमा (all-in-cost ceiling) के भीतर रहना चाहिए।

03अग्रिम भुगतान

बैंक तब अग्रिम की अनुमति दे सकता है जब उसे ज़रूरत सही लगे। विनियम अब पूरे देश के लिए डॉलर की एक तय सीमा नहीं रखते; हर बैंक अपनी सीमा तय कर सकता है, जिसके ऊपर वह स्टैंडबाय साख-पत्र या बैंक गारंटी माँगेगा। उस आयात का अग्रिम और बाद के सभी भुगतान एक ही बैंक से करें, या बैंक बदलें तो दोनों बैंकों को बताएँ।

  • सोना या चाँदी आयात करने के लिए कोई अग्रिम भुगतान अनुमत नहीं है।
  • अगर माल कभी नहीं आता, तो आपको अग्रिम वापस लाना होगा। ऐसा करने तक हर भावी अग्रिम के लिए किसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बैंक का स्टैंडबाय LC या गारंटी चाहिए।

04क्या फ़ॉर्म A1 अब भी चाहिए?

2026 के विनियम आयात भुगतान के लिए फ़ॉर्म A1 या कोई और तय फ़ॉर्म निर्धारित नहीं करते। हर बैंक अब अपनी प्रकाशित नीति और SOP में बताता है कि उसे कौन-से दस्तावेज़ चाहिए — आमतौर पर एक आवेदन, इनवॉइस और माल आने के बाद बिल ऑफ़ एंट्री। अपने बैंक से उसका वर्तमान आयात-भुगतान फ़ॉर्म और जाँच-सूची माँगें।

05रिकॉर्ड बंद करना

भुगतान के बाद बिल ऑफ़ एंट्री जमा करें ताकि बैंक IDPMS प्रविष्टि बंद कर सके। ₹10 लाख तक के बिल ऑफ़ एंट्री को बैंक आपकी इस घोषणा पर बंद कर सकता है कि भुगतान हो गया है, और आप ऐसी घोषणाएँ हर तिमाही एक साथ दे सकते हैं। अगर बैंक सौदे को सही मानता है, तो तीसरे पक्ष को भुगतान और निर्यात प्राप्तियों से समायोजन (set-off) भी संभव है।

स्रोत (2)
  1. RBI — FEM (Export and Import of Goods and Services) Regulations, 2026, amended up to 22 Sep 2026
  2. RBI — Master Directions index

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